आज के दौर में खेती सिर्फ खेत और हल तक सीमित नहीं रह गई है। मोबाइल, इंटरनेट, सेंसर, ड्रोन, ऐप्स और डिजिटल टूल्स ने खेती को बिल्कुल नए स्तर पर पहुँचा दिया है। इसी आधुनिक और स्मार्ट तकनीक आधारित खेती को डिजिटल खेती (Digital Farming) कहा जाता है।
डिजिटल खेती का उद्देश्य है—
कम लागत में ज्यादा उत्पादन,
सटीक खेती,
और किसान के काम को आसान बनाना।
इस लेख में आप जानेंगे—
✔ डिजिटल खेती क्या है
✔ इसमें कौन-कौन सी तकनीकें आती हैं
✔ किसान इसे कैसे शुरू कर सकते हैं
✔ इसके फायदे और चुनौतियाँ
🌱 डिजिटल खेती क्या है? (What is Digital Farming)
डिजिटल खेती वह आधुनिक तरीका है, जिसमें खेती से जुड़े कामों को करने के लिए मोबाइल ऐप, सेंसर, ड्रोन, इंटरनेट, डेटा एनालिसिस और स्मार्ट मशीनें इस्तेमाल की जाती हैं।
सीधे शब्दों में—
“जब खेती मोबाइल और तकनीक की मदद से ज्यादा स्मार्ट और सटीक तरीके से की जाए, उसे डिजिटल खेती कहते हैं।”
यह किसानों को फसल, मौसम, मिट्टी, कीट, सिंचाई, उर्वरक, मार्केट दाम आदि की रीयल-टाइम जानकारी देता है, जिससे फैसले सही समय पर और सही तरीके से लिए जा सकते हैं।
🔧 डिजिटल खेती में उपयोग होने वाली प्रमुख तकनीकें
1. मोबाइल ऐप और पोर्टल (Agriculture Apps)
- मिट्टी परीक्षण
- मौसम पूर्वानुमान
- फसल सुझाव
- उर्वरक-खाद मात्रा
- मंडी भाव
- सरकारी योजना जानकारी
उदाहरण: कृषि ऐप्स, डिजिटल कृषि पोर्टल, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड ऐप आदि।
2. ड्रोन तकनीक (Drone Farming)
- दवाई/खाद का स्प्रे
- खेत का नक्शा
- फसल स्वास्थ्य जांच (NDVI)
- बीमारी और कीट पहचान
3. IoT सेंसर (Soil & Water Sensors)
ये सेंसर खेत में लगाए जाते हैं और मोबाइल पर डेटा भेजते हैं:
- मिट्टी की नमी
- मिट्टी का तापमान
- हवा की गुणवत्ता
- सिंचाई का स्तर
4. स्मार्ट सिंचाई (Smart Irrigation Systems)
स्वचालित (ऑटोमैटिक) सिस्टम जो
केवल जरूरत के अनुसार पानी देते हैं।
इससे पानी की बचत 40–60% तक होती है।
5. GPS और GIS आधारित खेती
- खेत की सही मैपिंग
- ट्रैक्टर की ऑटो लाइन गाइडेंस
- सटीक बुवाई और खाद डालना
6. डेटा आधारित खेती (Data-Driven Farming)
मोबाइल और सेंसर से मिला डेटा किसान को बताता है:
✔ कौन सी फसल बोना बेहतर?
✔ कब खाद दें?
✔ सिंचाई कब करें?
✔ फसल में बीमारी कहाँ है?
🚜 डिजिटल खेती कैसे शुरू करें? (Step-by-Step Guide)
1. मोबाइल में कृषि ऐप डाउनलोड करें
शुरुआत मोबाइल से ही करें—
- Krishi Network
- Kisan Suvidha
- CropIn
- AgriApp
- mandi bhav apps
इनसे मौसम, उर्वरक, बीज, योजनाओं और बाजार भाव की जानकारी मिलेगी।
2. मिट्टी की जांच कराएं (Soil Testing)
खेत की मिट्टी को समझना डिजिटल खेती का पहला स्टेप है।
मिट्टी में क्या कमी है—यह ऐप और सेंसर दोनों बताएंगे।
3. स्मार्ट सिंचाई सिस्टम लगाएं
अगर संभव हो तो—
- ड्रिप
- स्प्रिंकलर
- सोलर पावर पंप
- नमी सेंसर
इससे पानी और बिजली दोनों की बचत होगी।
4. ड्रोन सेवा लें
अगर खुद ड्रोन नहीं खरीदना चाहते,
तो नज़दीकी कृषि केंद्र से ड्रोन स्प्रेिंग सेवा ले सकते हैं।
5. फसल की निगरानी डिजिटल तरीके से करें
NDVI, ड्रोन इमेज, मोबाइल फोटो द्वारा फसल का स्वास्थ्य पता करें।
6. मंडी भाव रोजाना देखें
मार्केट का डेटा बहुत महत्वपूर्ण है।
सही समय पर बेचने से मुनाफा बढ़ता है।
🌾 डिजिटल खेती के फायदे
✔ 30–40% तक लागत कम
✔ सिंचाई में 50% तक पानी की बचत
✔ उत्पादन में 20–50% तक बढ़ोतरी
✔ कीट/बीमारियों का पता जल्दी
✔ फसल गुणवत्ता बेहतर
✔ मेहनत कम, सटीकता ज्यादा
✔ सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से
⚠️ डिजिटल खेती की चुनौतियाँ
- इंटरनेट की कमी
- तकनीक की शुरुआती लागत
- प्रशिक्षण की कमी
- ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित उपकरण
लेकिन धीरे-धीरे सरकार और निजी संस्थाएँ इसे आसान बना रही हैं।
🌟 निष्कर्ष
डिजिटल खेती भविष्य की नहीं—आज की जरूरत है।
स्मार्ट खेती अपनाने से किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
शुरुआत मोबाइल ऐप और मिट्टी परीक्षण से करें,
फिर धीरे-धीरे स्मार्ट सिंचाई, सेंसर और ड्रोन जैसी तकनीक अपनाएं।
आने वाला समय पूरी तरह Digital Agriculture का है।